जिले के विशेष संरक्षित बैगा जनजाति बहुल ग्राम कुमान में पांच मासूम बच्चों की असामयिक मौत और 16 बच्चों के कुपोषित होने का मामला सामने आने के बाद बैगा समाज में आक्रोश है। मामले को लेकर समाज के कार्यवाहक जिलाध्यक्ष कामू बैगा ने स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने ग्राम कुमान और आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण करने के बाद राज्यपाल, मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, कलेक्टर कबीरधाम एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल, अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग
कामू बैगा के अनुसार, रेंगाखार स्वास्थ्य सेक्टर के प्रभारी आरएमए वीरेंद्र पालके द्वारा क्षेत्र में नियमित भ्रमण नहीं किए जाने और बच्चों की मौत के बाद भी गांव नहीं पहुंचने का आरोप है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने में लापरवाही बरती गई। समाज ने संबंधित स्वास्थ्य अधिकारी की भूमिका की जांच कर जवाबदेही तय करने की मांग की है।
16 कुपोषित बच्चे अस्पताल में भर्ती, पोषण व्यवस्था पर चिंता
ग्राम कुमान के 16 कुपोषित बच्चों के बोड़ला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती होने की जानकारी देते हुए बैगा समाज ने महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। समाज का आरोप है कि बच्चों को समय पर पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) भेजने और कुपोषण की रोकथाम के लिए जरूरी कदम उठाने में लापरवाही हुई। समाज ने क्षेत्र के सभी कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें बेहतर इलाज और समुचित पोषण उपलब्ध कराने की मांग की है।

मृतक बच्चों के परिजनों को मुआवजा देने की मांग
बैगा समाज ने पांचों मृत बच्चों के परिजनों को उचित आर्थिक सहायता देने, संबंधित विभागीय अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही बोड़ला एवं पंडरिया विकासखंड के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों से बैगा बच्चों के कुपोषण संबंधी अद्यतन आंकड़े जुटाकर सार्वजनिक करने तथा जरूरत पड़ने पर विशेष सर्वे कराने की मांग भी रखी गई है।
बैगा समाज का स्थायी रिकॉर्ड और स्थानीय बोली में जागरूकता पर जोर
ज्ञापन में बैगा समाज के बच्चों के जन्म-मृत्यु का स्थायी डेटाबेस तैयार करने, प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही निर्धारित करने और स्वास्थ्य एवं पोषण अभियानों में समाज के प्रमुखों को शामिल करने की मांग की गई है। समाज का कहना है कि स्थानीय बैगा बोली में जागरूकता अभियान चलाने से ग्रामीण परिवारों तक स्वास्थ्य और पोषण संबंधी जानकारी प्रभावी ढंग से पहुंचाई जा सकती है।
बैगा समाज ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो बच्चों के जीवन की सुरक्षा और समाज के अधिकारों के लिए आंदोलन किया जाएगा। अब इस मामले में प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।


