कवर्धा। जिले में चिकित्सा सेवा और आयुष्मान भारत योजना के सहारे एक गंभीर रूप से बीमार नवजात को नई जिंदगी मिली है। सातवें महीने में जन्मे नवजात सक्षम की आहार नली जन्मजात रूप से पूरी तरह विकसित नहीं थी और उसका पेट से संपर्क नहीं था। इसके चलते मां का दूध भी उसके पेट तक नहीं पहुंच पा रहा था और दूध पिलाना उसके लिए जानलेवा साबित हो सकता था।
जन्म के बाद बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर उपचार के लिए कवर्धा रेफर किया गया, जहां उसे मिश्रा अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष ने जांच के बाद बच्चे की गंभीर स्थिति की पहचान की। मामले की जटिलता को देखते हुए रायपुर से विशेषज्ञ सर्जन को बुलाया गया और नवजात की जटिल सर्जरी की गई। ऑपरेशन के दौरान उसकी आहार नली को जोड़ने का प्रयास किया गया।
सर्जरी के बाद भी बच्चे को लगातार विशेष निगरानी और उपचार की जरूरत थी। करीब डेढ़ महीने तक डॉक्टरों की निगरानी और देखभाल के बाद अब सक्षम की हालत में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। बच्चा अब अपनी मां का दूध पी पा रहा है और स्वस्थ होकर घर जाने की स्थिति में है।
इस पूरे इलाज में आयुष्मान भारत योजना परिवार के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई। आर्थिक रूप से सामान्य परिवार के लिए इतने गंभीर इलाज का खर्च उठाना मुश्किल था, लेकिन योजना के तहत इलाज का बड़ा हिस्सा कवर होने से परिवार पर आर्थिक बोझ कम हुआ।
परिजनों ने बच्चे की जान बचाने के लिए डॉक्टरों और आयुष्मान योजना के प्रति आभार जताया। डेढ़ महीने तक चले इस संघर्ष के बाद नवजात सक्षम की मुस्कान ने परिवार को राहत और उम्मीद दी है।
डेढ़ महीने का संघर्ष… आयुष्मान बना ‘संजीवनी’, जटिल ऑपरेशन के बाद स्वस्थ हुआ नवजात सक्षम


