माँ नर्मदा के पवित्र तट से भोरमदेव तक आस्था की 151 किमी यात्रा शुरू, पंडरिया विधायक भावना बोहरा के साथ 600 से अधिक कांवड़ियों ने उठाया जलाभिषेक का संकल्प, ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयघोष से गूंजा अमरकंटक

सावन के द्वितीय सोमवार पर पवित्र नगरी अमरकंटक हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से गूंज उठी। पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने माँ नर्मदा मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि, शांति, खुशहाली और निरंतर प्रगति की कामना के साथ अमरकंटक से भोरमदेव मंदिर तक 151 किलोमीटर लंबी कांवड़ पदयात्रा का शुभारंभ किया।

यात्रा में विधायक भावना बोहरा के साथ 600 से अधिक कांवड़ यात्री शामिल हुए। खास बात यह रही कि उनके प्रयासों से अपने मूल धर्म में वापसी करने वाले वनांचल क्षेत्र के 15 बैगा आदिवासी समाज के लोगों ने भी इस पावन यात्रा में सहभागिता की। माँ नर्मदा और भगवान भोलेनाथ के जयघोष से अमरकंटक का पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

लमनी तक पहला पड़ाव, जंगल-पगडंडियों से आगे बढ़े कांवड़िए

कांवड़ यात्रा का पहला दिन माँ नर्मदा मंदिर अमरकंटक से शुरू होकर गणेश मंदिर पहाड़, आमाडोल और खपरा खोल होते हुए लमनी तक निर्धारित है। घने जंगलों, दुर्गम पगडंडियों और बीहड़ रास्तों के बीच कांवड़िए पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

यह यात्रा 10 से 16 अगस्त तक चलेगी और जलेश्वर महादेव डोंगरिया तथा भोरमदेव मंदिर में भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक के साथ संपन्न होगी।

यात्रा से पहले श्रद्धालुओं की सेवा

यात्रा के शुभारंभ से एक दिन पहले विधायक भावना बोहरा ने अमरकंटक के मेला मैदान में कबीरधाम जिले से पहुंचे कांवड़ यात्रियों से आत्मीय मुलाकात की। उन्होंने श्रद्धालुओं को स्वयं भोजन परोसा और भजन संध्या में शामिल होकर उनके साथ समय बिताया।

10 अगस्त को यात्रा के शुभारंभ अवसर पर पंडरिया विधानसभा के भाजपा पदाधिकारी-कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि, समाज प्रमुख, महिला मोर्चा की पदाधिकारी-कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में शिवभक्त अमरकंटक पहुंचे।

‘कांवड़ यात्रा मेरे लिए श्रद्धा और सेवा का संकल्प’

विधायक भावना बोहरा ने कहा कि यह यात्रा उनके लिए केवल कांवड़ यात्रा नहीं, बल्कि माँ नर्मदा और भगवान भोलेनाथ के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सेवा-भाव का पवित्र संकल्प है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली बनी रहे तथा प्रदेश विकास के नए आयाम स्थापित करे, इसी मंगलकामना के साथ यह यात्रा शुरू की गई है।

उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा आस्था, तपस्या, अनुशासन और समर्पण का प्रतीक है। यह यात्रा नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का माध्यम भी है।

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