कबीरधाम जिले के कवर्धा वन मंडल अंतर्गत सहसपुर लोहारा वन परिक्षेत्र से वन्य प्राणी संरक्षण को लेकर एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। क्षेत्र में एक तेंदुए का करीब 10 दिन पुराना शव मिलने से हड़कंप मच गया है। शव की स्थिति अत्यंत खराब बताई जा रही है, जहां तेंदुए का सिर पूरी तरह सड़ चुका था, जबकि रीढ़ की हड्डी और पूंछ को बरामद कर जांच के लिए भेजा गया है।
वन विभाग के अनुसार तेंदुए की मौत के कारणों की पुष्टि अभी नहीं हो सकी है, लेकिन करंट लगने से मौत की आशंका जताई जा रही है। जिस स्थान पर शव मिला, वहां से करीब 21 किलोग्राम जीआई तार बरामद किया गया है, जिससे अवैध तरीके से करंट फैलाकर शिकार किए जाने की संभावना और मजबूत हो गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने जांच तेज कर दी है। ग्रामीणों से पूछताछ की जा रही है, वहीं एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर उससे पूछताछ भी की जा रही है। इस पूरे प्रकरण में लापरवाही सामने आने पर मुख्य वन संरक्षक ने कड़ी कार्रवाई करते हुए परिसर रक्षक मोतिमपुर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
वन विभाग का दावा है कि कबीरधाम के जंगल वन्य प्राणियों के लिए अनुकूल हैं, इसी कारण तेंदुआ, बायसन सहित अन्य वन्य जीवों की आवाजाही लगातार देखी जा रही है। लेकिन बीते कुछ समय में कवर्धा के जंगल में 4 बायसन और तेंदुए वन्यजीव की शिकार के कारण मौत के मामलों के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
एक ओर कवर्धा के जंगलों में वन्य प्राणियों की बहुलता देखी जा रही है, वहीं दूसरी ओर उनके संरक्षण में घोर लापरवाही सामने आ रही है। अवैध शिकार की घटनाओं में बढ़ोतरी यह संकेत दे रही है कि जंगलों की निगरानी व्यवस्था कमजोर होती जा रही है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वह दिन दूर नहीं जब कवर्धा के जंगलों से वन्य प्राणियों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।
यह घटना न केवल वन विभाग की सतर्कता पर सवाल खड़े करती है, बल्कि वन्य प्राणी संरक्षण के दावों की भी पोल खोलती है। अब देखना होगा कि विभाग इस मामले में कितनी सख्ती दिखाता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।



