कवर्धा से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित छोटे से गांव भागूटोला ने एक बड़ी मिसाल पेश की है। यहां के ग्रामवासियों ने घुमंतू पशुओं की सेवा, सुरक्षा और संरक्षण की ऐसी अनूठी पहल की है, जो पूरे जिले के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है। गांव के लोग बारी-बारी से समय और श्रमदान कर सड़कों पर घूमने वाले पशुओं की देखरेख कर रहे हैं।
देव पूर्णिमा के अवसर पर कलेक्टर गोपाल वर्मा और जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू ने भागूटोला पहुंचकर ग्रामवासियों से मुलाकात की, गौमाता को सुहई पहनाकर पूजा-अर्चना की और ग्रामीणों की इस पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
कलेक्टर श्री वर्मा ने कहा, “भागूटोला के ग्रामीणों ने मानवता और सामूहिक जिम्मेदारी की अद्भुत मिसाल पेश की है। इस पहल से न सिर्फ पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी।” उन्होंने अन्य गांवों से भी इस तरह की पहल करने की अपील की।

गांव के लोग सामूहिक रूप से रोजाना 8 से 10 व्यक्तियों का समूह बनाकर इन घुमंतू पशुओं को चराने, खिलाने और देखरेख करने का कार्य करते हैं। इस समय गांव में लगभग 300 से 350 पशुओं की नियमित सेवा की जा रही है।
जिला पंचायत अध्यक्ष श्री साहू ने कहा कि भागूटोला के ग्रामवासी गौसेवा, परंपरा और सामाजिक एकता के जीवंत प्रतीक हैं। यह पहल न केवल पशु संरक्षण को बढ़ावा दे रही है, बल्कि समाज में सेवा और सहयोग की भावना को भी मजबूत कर रही है।
ग्रामवासी पवन पटेल ने बताया कि तीन महीने पहले सभी ने मिलकर निर्णय लिया था कि वे गांव के आसपास घूमने वाले पशुओं की देखभाल स्वयं करेंगे। अब यह पहल पूरे गांव की पहचान बन चुकी है।
भागूटोला की यह पहल दिखाती है कि जब संवेदना, एकता और जिम्मेदारी एक साथ आती है, तो कोई भी समाज सकारात्मक बदलाव की मिसाल बन सकता है।


