मोर चिंहारी के तत्वावधान में चल रहा “पानी बचाओ–बानी बचाओ” अभियान जिले में जल संरक्षण और मातृभाषा संवर्धन को लेकर व्यापक जनसमर्थन जुटा रहा है। विश्व मातृभाषा दिवस (21 फरवरी) पर बैगा बहुल ग्राम बांकी स्थित हॉफ नदी के उद्गम से प्रारंभ हुई पदयात्रा का प्रथम चरण दूसरे दिन पंडरिया पहुँचकर पूर्ण हुआ।
पंडरिया में नागरिकों ने पदयात्रियों का आत्मीय स्वागत किया। सभा के दौरान वक्ताओं ने जल स्रोतों के संरक्षण और मातृभाषा के सम्मान को जीवन से जोड़ते हुए जनभागीदारी का आह्वान किया।
अभियान संयोजक डॉ. वैभव बेमेतरिहा ने कहा कि बदलते समय में जल संकट और भाषाई पहचान का क्षरण गंभीर चुनौती बन चुका है। छत्तीसगढ़ी केवल भाषा नहीं, बल्कि संस्कृति और आत्मसम्मान की पहचान है, जिसे शिक्षा, संवाद और व्यवहार में स्थान मिलना चाहिए।
उन्होंने चेताया कि हॉफ नदी समेत कई स्थानीय जलधाराएँ सिमटती जा रही हैं। गर्मी में बढ़ती जलकमी आने वाले संकट का संकेत है, इसलिए अभी से सजग होना जरूरी है।
अभियान का द्वितीय चरण 28 फरवरी से पंडरिया क्षेत्र से शुरू होकर अंधियारखोर, बुचीपारा सहित अनेक गांवों से गुजरते हुए 2 मार्च को नांदघाट में शिवनाथ नदी के संगम पर समापन करेगा।
“पानी बचाओ–बानी बचाओ” पदयात्रा पंडरिया पहुँची, जल और मातृभाषा संरक्षण का संकल्प


