अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के पावन अवसर पर नगर के प्रतिष्ठित अशोका पब्लिक विद्यालय के प्रार्थना सभागार में आयोजित विधिक जागरूकता शिविर एक सामान्य कार्यक्रम न होकर विद्यार्थियों के जीवन में कानून की समझ और आत्मविश्वास का दीप प्रज्वलित करने वाला प्रेरक आयोजन बन गया। कक्षा 8वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए आयोजित इस शिविर ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब न्याय व्यवस्था सीधे बच्चों से संवाद करती है, तब कानून भय का कारण नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक बन जाता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के संचालक पवन देवांगन, श्रीमती सारिका देवांगन, प्राचार्य एस.एल. नापित एवं प्राचार्य लोकनाथ देवांगन की उपस्थिति में हुआ। विद्यार्थियों द्वारा अतिथियों का सादे, स्नेहिल एवं आत्मीय भाव से पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया, जिससे यह संदेश गया कि बच्चे केवल श्रोता नहीं, बल्कि इस विधिक संवाद के सक्रिय सहभागी हैं।
न्यायाधीशों का अनोखा अंदाज़: मंच से उतरकर बच्चों के बीच
शिविर की सबसे बड़ी विशेषता रही न्यायिक अधिकारियों का औपचारिक मंच छोड़कर सीधे विद्यार्थियों के बीच आकर संवाद करना।
मुख्य अतिथि अमन तिग्गा, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कवर्धा ने बाल विवाह, यौन अपराध एवं साइबर अपराध जैसे गंभीर विषयों को अत्यंत सरल, संवादात्मक और उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने बताया कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य को गंभीर रूप से प्रभावित करने वाला अपराध है। कम उम्र में विवाह से न शारीरिक परिपक्वता आती है और न ही मानसिक, जिसका सीधा असर जीवन की स्थिरता पर पड़ता है।
POCSO Act पर विशेष जोर: चुप्पी नहीं, जागरूकता जरूरी
कार्यक्रम में POCSO Act पर विशेष बल दिया गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि यौन उत्पीड़न किसी भी रूप में अपराध है और इसके विरुद्ध कानून कठोर है। लिंग निर्धारण जैसे अपराधों पर चर्चा करते हुए बताया गया कि यह न केवल गैर-कानूनी है, बल्कि समाज के संतुलन को भी बिगाड़ता है। जहाँ राष्ट्रीय स्तर पर लिंग अनुपात 970 है, वहीं कवर्धा जिले में 997 का अनुपात आशा का संकेत है, जिसे बनाए रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
“कानून क्या है?”—सरल प्रश्न, गहरी समझ
विशेष अतिथि गौरव महिलांग, प्रथम व्यवहार न्यायाधीश (कनिष्ठ श्रेणी), कवर्धा ने विद्यार्थियों से प्रश्न किया—
“कानून क्या है?”
और स्वयं उत्तर देते हुए कहा कि कानून नियमों का वह समूह है, जो समाज को सही दिशा देता है और नियमों के उल्लंघन पर दंड सुनिश्चित करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून केवल सज़ा देने की व्यवस्था नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा की मजबूत ढाल है।

CRPC, साइबर अपराध और झूठे आरोपों की सख्ती
श्री अमन तिग्गा ने CRPC के अंतर्गत जानबूझकर किए गए आपराधिक कृत्यों, साइबर माध्यमों से फैलने वाली अश्लील सामग्री, VPN के दुरुपयोग एवं बिना प्रमाण आरोप लगाने की कानूनी जटिलताओं को उदाहरण सहित समझाया। उन्होंने बताया कि बिना सबूत आरोप लगाने पर भी 2 से 5 वर्ष तक की सजा और असीमित जुर्माने का प्रावधान है।
कानून—न्यायालय की नहीं, जीवन की भाषा में
विशेष अतिथि कु. सुमिता रानी, द्वितीय व्यवहार न्यायाधीश (कनिष्ठ श्रेणी), कवर्धा ने बालिकाओं को आत्मसम्मान, आत्मरक्षा एवं अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कानून तभी प्रभावी होता है, जब नागरिक उसे जानें और समझें।
एक शिविर नहीं, सुरक्षित भविष्य की नींव
यह विधिक जागरूकता शिविर विद्यार्थियों के लिए केवल जानकारी का माध्यम नहीं, बल्कि सोच बदलने वाला मंच साबित हुआ। कार्यक्रम ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि बालिका दिवस केवल एक तारीख नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है—बालिकाओं को सुरक्षित, शिक्षित और सशक्त बनाने की।
विद्यालय का असेंबली हॉल इस दिन न्याय, संवेदना और विश्वास का साक्षी बना, जहाँ कानून पुस्तकों से निकलकर बच्चों के जीवन से जुड़ गया।
कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथियों द्वारा नर्सरी से कक्षा 2 तक की खेल प्रतियोगिताओं के विजेताओं, “मेरे सपनों का शहर” सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं निबंध प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।


