कवर्धा(हमरखबर)
कहते हैं हौसले बुलंद हों तो हालात भी घुटने टेक देते हैं। इस कहावत को सच कर दिखाया है कबीरधाम जिले के कवर्धा शहर की बेटी रिया तिवारी ने, जिन्होंने आर्थिक अभाव और सीमित संसाधनों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का परचम लहराया है।
पटना (बिहार) में 27 से 29 दिसंबर 2025 तक आयोजित दक्षिण एशियाई बॉल बैडमिंटन चैंपियनशिप में रिया तिवारी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले में भारत ने श्रीलंका को 35–13, 35–13 के बड़े अंतर से पराजित कर गोल्ड मेडल जीता।
संघर्षों से निकली सफलता की कहानी
रिया तिवारी एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता राजेश कुमार तिवारी एक छोटे व्यापारी हैं, जिनकी सीमित आय से परिवार की आजीविका चलती है। आर्थिक तंगी कई बार रिया के सपनों के आड़े आई, लेकिन पिता का विश्वास कभी कमजोर नहीं पड़ा।
इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में बेटी को शामिल कराने के लिए पिता को कर्ज तक लेना पड़ा, लेकिन उन्हें पूरा भरोसा था कि उनकी बेटी देश का नाम रोशन करेगी — और रिया ने उस भरोसे को सच कर दिखाया।
छत्तीसगढ़ की बेटियों ने बनाई पहचान
इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ के तीन खिलाड़ियों ने विशेष पहचान बनाई, जिनमें कबीरधाम की रिया तिवारी का प्रदर्शन सबसे प्रभावशाली रहा। पूरे टूर्नामेंट में रिया ने अनुशासन, आत्मविश्वास और बेहतरीन खेल का परिचय दिया।
“नारी शक्ति” की मिसाल बनी रिया
अपनी सफलता का श्रेय रिया ने अपने कोच और माता-पिता के अटूट समर्थन को दिया है। रिया का कहना है कि आर्थिक अभाव आज भी कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से नैतिक और आर्थिक सहयोग की अपील की है, ताकि ग्रामीण और छोटे शहरों की बेटियां भी बड़े सपने पूरे कर सकें।
सपने अभी बाकी हैं
रिया तिवारी कहती हैं—
“हौसला अभी बाकी है, सपने अभी और बड़े हैं। मैं आगे भी इससे बेहतर प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन करना चाहती हूं।”
कवर्धा की यह बेटी आज सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि नारी शक्ति, पिता के त्याग और संघर्ष से मिली सफलता की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी है।
कवर्धा की बेटी रिया तिवारी बनी देश की शान, संघर्ष के बीच देश के नाम गोल्ड मेडल लेकर रचा इतिहास


