छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले की बेटी आकांक्षा सत्यवंशी ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम की वर्ल्ड कप जीत में पर्दे के पीछे से अहम योगदान देकर प्रदेश का नाम रोशन किया है। बतौर फिजियोथैरेपिस्ट और स्पोर्ट्स साइंस विशेषज्ञ, आकांक्षा ने खिलाड़ियों की फिटनेस, रिकवरी और इंजरी प्रिवेंशन पर निरंतर काम किया, जिससे टीम ने ऐतिहासिक जीत हासिल की।
आकांक्षा सत्यवंशी मूलरूप से कवर्धा के ठाकुर पारा की निवासी हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा छत्तीसगढ़ में पूरी की और इसके बाद फिजियोथैरेपी में मास्टर्स कटक (ओडिशा) से किया। पढ़ाई के दौरान ही उन्हें एहसास हुआ कि फिजियोथेरेपी ही उनका सच्चा जुनून है।
उनके पिता पीएचई विभाग में एसडीओ के पद से सेवानिवृत्त हैं और वर्तमान में रायपुर में निवासरत हैं। परिवार ने हमेशा आकांक्षा को अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित किया।
आकांक्षा ने अपने करियर की शुरुआत छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ से की, जहां उनके समर्पण और उत्कृष्ट प्रदर्शन ने उन्हें बीसीसीआई महिला टीम के असिस्टेंट फिजियोथैरेपिस्ट के रूप में स्थान दिलाया। उन्होंने अंडर-19 महिला टीम और सीनियर महिला टीम दोनों के साथ काम किया।

महिला क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक जीत के पीछे आकांक्षा की वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाली फिटनेस योजनाएं और थैरेपी तकनीकें बेहद उपयोगी साबित हुईं। जब भारतीय महिला टीम ने दक्षिण अफ्रीका को 52 रनों से हराकर पहला महिला वनडे वर्ल्ड कप जीता, तो कवर्धा में खुशी की लहर दौड़ गई।
इस उपलब्धि पर राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने आकांक्षा को बधाई देते हुए कहा कि “आकांक्षा जैसी प्रतिभाशाली बेटियां छत्तीसगढ़ का गौरव हैं। उन्होंने दिखा दिया कि मैदान के बाहर भी सफलता के असली नायक मौजूद होते हैं।”
अब आकांक्षा का लक्ष्य सिर्फ फिजियोथैरेपी तक सीमित नहीं है, बल्कि वे स्पोर्ट्स मेडिकल रिसर्च और हाई-परफॉर्मेंस सिस्टम्स के विकास में भी योगदान देना चाहती हैं।
उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि खेल की दुनिया में जीत सिर्फ खिलाड़ियों की नहीं होती — बल्कि उन विशेषज्ञों की भी होती है जो पर्दे के पीछे रहकर सफलता की नींव तैयार करते हैं। कवर्धा की आकांक्षा सत्यवंशी आज पूरे छत्तीसगढ़ और देश के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।


