छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर जिले में 2 से 4 नवंबर तक तीन दिवसीय भव्य राज्योत्सव का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन आचार्य पंथ श्री गृथमुनि नाम साहेब शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय मैदान में होगा, जहां छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और लोक परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी।
राज्योत्सव के प्रथम दिवस 2 नवंबर को कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहेगा पद्मश्री डॉ. भारती बंधु का कबीर गायन। उनकी सुमधुर वाणी से कवर्धा की धरती भक्ति, सद्भाव और समरसता के सुरों से गूंज उठेगी। डॉ. भारती बंधु अपने भजनों के माध्यम से समाज में प्रेम, एकता और मानवता का संदेश देंगे।

शाम 5 बजे से आरंभ होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियाँ होंगी। कस्तूरबा आवासीय विद्यालय, जिला कबीरधाम के विद्यार्थी “छत्तीसगढ़ दर्शन – प्रमुख त्यौहार” लोकनृत्य के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि को प्रदर्शित करेंगे। इसके बाद धनीदास मानिकपुरी का “मयारु के मया” लोकनृत्य दर्शकों को छत्तीसगढ़ी माटी की खुशबू से सराबोर कर देगा।
श्री विष्णु यादव की करमा और ददरिया प्रस्तुतियाँ “माटी के चंदन” श्रोताओं को लोकसंगीत की मिठास से मंत्रमुग्ध करेंगी। इसके पश्चात कौशल साहू एवं अनुप श्रीवास्तव की हास्य जुगलबंदी माहौल में हंसी और आनंद भर देगी।
सरगम टीचर्स ग्रुप (महेश सिंह ठाकुर एवं साथी) द्वारा संगीत गायन, वातावरण को सुरों की मधुरता से भर देगा। वहीं लोककला मंच कार्यक्रम “गहना गांठी” में श्री प्रमोद सेन एवं उनके साथी छत्तीसगढ़ी लोकजीवन की सुंदर झलक प्रस्तुत करेंगे।
काव्यगूंज म्यूजिकल ग्रुप के गौरव एवं स्वाती गुप्ता के भजन आत्मा को स्पर्श करेंगे। कार्यक्रम का समापन दानी वर्मा एवं साथियों के लोकनृत्य “परसा के फूल” से होगा, जो राज्योत्सव को एक मनमोहक और यादगार समापन प्रदान करेगा।
यह तीन दिवसीय राज्योत्सव कवर्धा की जनता के लिए आनंद, उत्साह और छत्तीसगढ़ी अस्मिता का पर्व साबित होगा।


